हरिद्वार से बड़ी खबर……..सरकारी रेट से अधिक कीमत पर बिक रही शराब, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई; आबकारी अधिकारी के कथित जवाब पर उठे सवाल

नील धारा ब्यूरो

हरिद्वार (नील धारा) जनपद में शराब की दुकानों पर सरकारी निर्धारित मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत वसूले जाने का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई शराब की दुकानों पर खुलेआम निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे लिए जा रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद आबकारी विभाग इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में रुचि नहीं दिखा रहा।शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने स्वयं इस संबंध में आबकारी अधिकारी को फोन कर पूरे मामले से अवगत कराया। उनका कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि विभाग तत्काल संबंधित दुकान पर जांच कर कार्रवाई करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने आबकारी अधिकारी से कहा कि यदि विभाग कार्रवाई नहीं करेगा तो वह इस पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी (डीएम) से करेंगे, तो अधिकारी ने कथित रूप से जवाब दिया, “मिल लो जाकर।”शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस जवाब से यह संदेश गया कि विभाग शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहा। उनका कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही इस तरह का रवैया अपनाएंगे तो आम उपभोक्ता न्याय की उम्मीद किससे करेगा। उन्होंने कहा कि शराब की दुकानों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और यदि प्रत्येक ग्राहक से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली जा रही है, तो यह लाखों रुपये की अतिरिक्त वसूली का मामला हो सकता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब की दुकानों पर ओवररेटिंग की शिकायत कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर इस प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई न होने से दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई दुकानों पर बिल भी उपलब्ध नहीं कराया जाता और विरोध करने पर ग्राहकों को संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। शराब की दुकानों पर औचक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्धारित सरकारी मूल्य पर ही शराब बेची जा रही है। यदि जांच में ओवररेटिंग की पुष्टि होती है तो संबंधित दुकान संचालकों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए।यह मामला अब केवल ओवररेटिंग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और शिकायतों के प्रति उसके रवैये पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आमजन का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण लगातार जारी रहेगा।

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