हेमकुंड साहिब विवाद को लेकर हरिद्वार से सिख समाज में रोष, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन…..

नील धारा ब्यूरो

हरिद्वार। उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद को लेकर सिख समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है। घटना की निष्पक्ष जांच, एकतरफा कार्रवाई रोकने तथा क्रॉस मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर हरिद्वार से सिख समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने श्री गुरु नानक देव जी धर्म प्रचार समिति के अध्यक्ष सूबा सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में उप जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखंड के नाम ज्ञापन सौंपा।समिति के अध्यक्ष सूबा सिंह ढिल्लों ने कहा कि गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान सिख श्रद्धालुओं के साथ हुई घटना से पूरे सिख समाज में गहरा रोष है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो के आधार पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि घटना की शुरुआत एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा निहंग सिख पर डंडे से हमला करने से हुई। इसके बाद आत्मरक्षा में निहंग सिख द्वारा तलवार निकालने की घटना भी वीडियो में दिखाई दे रही है। साथ ही कुछ लोगों द्वारा पत्थरबाजी किए जाने के दृश्य भी सामने आए हैं,

जो अत्यंत निंदनीय हैं।समिति के संरक्षक बाबा पंडित जी ने कहा कि इस मामले में केवल सिख समुदाय के लोगों को ही दोषी ठहराते हुए गिरफ्तार किया गया, जबकि घटना में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ समान कार्रवाई नहीं की गई। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में गिरफ्तार व्यक्तियों के साथ पुलिस द्वारा कथित रूप से मारपीट किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं, जिससे वे चलने-फिरने की स्थिति में नहीं दिखाई दे रहे हैं।उन्होंने बताया कि गिरफ्तार सिखों की पगड़ी उतरवाकर उन्हें नंगे सिर न्यायालय में पेश किया गया, जो सिख धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है। सिख धर्म में पगड़ी को अत्यंत सम्मान और गुरु साहिबानों की अमूल्य देन माना जाता है।ज्ञापन के माध्यम से सिख समाज ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने, घटना में शामिल सभी पक्षों के विरुद्ध समान रूप से कानूनी कार्रवाई करने तथा सोशल मीडिया पर सिख समाज, लंगर सेवा और गुरुद्वारों के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।सिख समाज ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र, निष्पक्ष एवं उचित कार्रवाई नहीं की गई तो समाज बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।ज्ञापन सौंपने वालों में बाबा पंडित जी, सूबा सिंह ढिल्लों, उज्जल सिंह, हरभजन सिंह बाजवा, जोगिंदर सिंह चीमा एवं बिक्रमजीत सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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